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।। संतानप्राप्ति - महायज्ञ ।।

विशेषतः संसार में दो पकार के मनुष्य पाये जाते है जैसे कि एक संतानवान, एक संतानहीन। दोनो की एक ही समस्या है। एक संतानवान होने के बाद भी दुखी होता है। और एक संतान न होने के कारण दुखी होता है। इस कारण को समझने के लिए मनुष्य को संतान गोपाल मंत्र का यज्ञ अनुष्ठान कराने से मनुष्य के घर में आज्ञाकारी यशस्वी कुल के नाम को रोशन करने वाली संतान उत्पन्न होती है।

उदाहरणः हम अपनी कामना को अपने आप में शुद्ध विचार के साथ रखते हैं तो हमारे घर में श्रवण कुमार की जैसी संतान उत्पन्न होती है। यह संतान जन्म लेने से पहले और बाद के कुलो के लिए आदर्श साबित होती है। जिसका संसार प्रमाण देता है। ऐसी संतान की प्राप्ति के लिए हमारी संस्था में संतान प्राप्ति यज्ञ वैदिक विधि विधान के साथ कराया जाता है।

संतान प्राप्ति यज्ञ न कराने से हानि :
घर में संतानहीन होना, व्याभिचारी संतान का होना, अज्ञानी संतान का होना, कुल द्रोही संतान का होना आदि।

संतान प्राप्ति यज्ञ कराने की विधि : संतान गोपाल मंत्र का सवा लक्ष्य जप, जप का दशांश, दशांश दर्पण, दशांश मार्जन इत्यादि। श्री हरिबंश पुराण का पाठ कुटुम्ब मित्रों के साथ सपत्नीक श्रणव करना आदि।

संतान प्राप्ति यज्ञ कराने की वेदी : चर्तुलिंगतोभद्र, मण्डल, षोडस मात्रिका मण्डल, नवग्रह मण्डल, वास्तु मण्डल, क्षेत्रपाल मण्डल, पंचाग मण्डल आदि इन मण्डलों पर तैतीस करोड़ देवताओं का ध्यान, आहवन, पूजन करके जप यज्ञ सम्पन्न कराया जाता है।