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।। पितृदोष - निवारणयज्ञ ।।

विशेषतः पितृदोष एक ऐसा भयानक दोष है जिसका दुष्परिणाम आने वाली कई पीढ़ियों तक को भुगतना पढ़ता है। मनुष्य अपने किये गये कर्म का फल प्राप्त नहीं कर पाता है। संतान उत्पन्न होकर आकारण कलन्कित हो जाती है। शिशु की गर्भ में मृत्यु हो जाती है। और घर में तरह - तरह की आपदा आती है। जैसे व्यापार में घाटा, नौकरी में डिमोशन, घर में निसंतान होना, परिवार में कलह-क्लेश इत्यादि।

उदाहरणः पितृदोष के कारण मनुष्य के जीवन में तरह तरह की उलझनें, कठिनाईयां व भयानक स्वप्न आना जैसे : हवा में उड़ना, भागना, रंग बिरंगे सर्पों के स्वप्न, मरे हुए अपने पूर्वजों ईष्ट मित्रों के स्वप्न आते हैं।

पितृदोष यज्ञ कराने से विधि : सपिन्डी श्राद्ध, त्रिपिन्डी श्राद्ध, सवा लक्ष्य पितृ गायत्री मंत्र जप, विष्णु सहस्र नाम पाठ आदि कई प्रकार के पूजा पाठ के माध्यम के साथ सम्पन्न कराया जाता है।

पितृदोष यज्ञ कराने की वेदी : चर्तुलिंगतोभद्र, मण्डल, षोडस मात्रिका मण्डल, नवग्रह मण्डल, वास्तु मण्डल, क्षेत्रपाल मण्डल, पंचाग मण्डल आदि इन मण्डलों पर तैतीस करोड़ देवताओं का ध्यान, आहवन, पूजन करके जप यज्ञ सम्पन्न कराया जाता है।

निर्देशः पितृदोष शान्ति यज्ञ किसी सप्त नदी के तट पर, दैवालय में वैदिक विधि विधान से वैदिक विद्वानों के साथ सम्पन्न कराना चाहिए।