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।। गृह-प्रवेश ।।

विशेषत : सनातम धर्म के अनुसार मनुष्य के जीवन में गृह प्रवेश को ऋषि मुनियों के कथनानुसार बहुत बड़ा महत्व है। जिनके द्वारा कहा गया है कि घर एक मन्दिर के समान होता है।

उदाहरण : दंत कथाओं में वर्णन आता है कि माता मां पार्वती के बार-बार निवेदन करने पर भगवान महादेव ने अपने परिवार के लिए स्वर्ण महल का निर्माण कराया। जिसके गृह प्रवेश कराने के लिए तीनो लोक में योग्य ब्राहमण की खोज करने के बाद रावण उनको सर्वश्रेष्ठ ब्राहमण मिला। रावण ने भगवान शिव के महल में प्रवेश करने की सारी प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद दक्षिणा के लिए कहा जिस पर भोले नाथ प्रसन्न होकर बोले मांगो जो चाहिए। तब रावण ने उसी महल के लिए आग्रह किया। जो लंका नगरी के नाम से सुशोभित हुई। तब भगवान भोलेनाथ ने तीनों लोकों को यह संदेश दिया कि भवन तो बड़े भाग्य वालों को ही नसीब होता है और उससे भी ज्यादा सौभाग्यशाली वह होते हैं जो वैदिक विधि विधान के साथ पूजा पाठ करके भवन में प्रवेश करते हैं। ऐसे भवन में सुख समृद्धि लक्ष्मी गणेश के साथ वास करते हैं।

गृह प्रवेश कराने की वेदी : चर्तुलिंगतोभद्र, मण्डल, षोडस मात्रिका मण्डल, नवग्रह मण्डल, वास्तु मण्डल, क्षेत्रपाल मण्डल, पंचाग मण्डल आदि इन मण्डलों पर तैतीस करोड़ देवताओं का ध्यान, आहवन, पूजन करके जप यज्ञ सम्पन्न कराया जाता है।

गृह प्रवेश न कराने से हानीः भवन में रहने वाले रोग ग्रसित होते हैं। भवन में आय दिन कलह कलेश बना रहता है। अकाल मृत्यु का भय, दुर्घटना भय, आगजनी भय आदि प्रकार के दोष पाये जाते हैं।

निर्देश : गृह प्रवेश की प्रक्रिया बहुत ही सूक्ष्म तरीके से सावधानी के साथ विशेष मुहुर्त में सम्पन्न कराने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।