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।। बगलामुखी महायज्ञ।।

विशेषतः बंगलामुखीयज्ञ इन्सान को विपरीत परिस्थिति में कराने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसको शत्रुशमन यज्ञ भी कहा जाता है। दस महा विद्या में बगलामुखी माता का नाम आता है। इनकी उपासना मनुष्य को विशेष रूप से रात्रीकाल में वैदिक विद्वानों के द्वारा जो बुगलामुखि के उपासक हों उन्हीं से सम्पन्न कराना चाहिए।

बंगलामुखि यज्ञ कराने से लाभ : शत्रु पर विजय, रोग मुक्ति, ऋण मुक्ति, नौकरी में पदौन्नती, सौतन से छुटकारा आदि असम्भव कार्य को सिद्ध करने के लिए भी कराया जाता है।

बंगलामुखि यज्ञ कराने की विधि : मां बुगलामुखि का 1 लाख मंत्र जप रात्रि काल में दिक्षित 9 ब्राहमणों को पीला वस्त्र एवं पीले भोजन के साथ घर में या दैवालय या किसी सप्त नदी के तट पर 7 दिन तक कराया जाता है। जप सम्पन्न कराने के पश्चात् दशांश हवन एवं मंत्र जप से पहले और जप के बाद संग्राम विजयनी विद्या का पाठ भी किया जाता है।

उदाहरण : माता पिताम्बरा का पीठ इस प्रकार विधिवत जप तप यज्ञ अनुष्ठान कराने से मनुष्य की मनोकामनाऐं 90 दिनों के अंदर ही पूर्ण होती हैं।

पाठ के लिए वेदी : गौरी तिलक मण्डल, षोडस मात्रिका मण्डल, नवग्रह मण्डल, वास्तु मण्डल, क्षेत्रपाल मण्डल, पंचाग मण्डल आदि इन मण्डलों पर तैतीस करोड़ देवताओं का ध्यान, आहवन, पूजन करके पाठ सम्पन्न कराया जाता है।

निर्देश : शुद्धता और योग्यता विचार पर विशेष ध्यान यजमान और ब्राहमण को देना पड़ेगा। नहीं तो अरिष्ठ होने की सम्भावना होती है।