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।। विवाह संस्कार ।।

विशेषतः विवाह संस्कार बड़े ही सौभाग्य का विषय है कि हमारा जन्म इस धरा पर मनुष्य के रूप में हुआ है। इस धरातल पर 83 लाख 99वें हजार 9सौ 99वें योनियां ऐसी है जिसमें भोग लिप्त हैं। मात्र एक ही मनुष्य योनि ऐसी है जिसमें योग भोग दोनो ही होते हैं। जिससे मनुष्य के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण विवाह का बंधन होता है विवाह का बंधन न सिर्फ पवित्र माना जाता है बल्कि इस पवित्र बंधन से दो अंजान जीव एक साथ मिलकर साथ निभाने का प्रण करते हैं। इंसान के जीवन में किसी भी संस्कार की कमी होने पर उसकी आत्मा आत्मा सदैव इस धराधाम पर विचरती रहती है। जैसा कि पुनिरपि जननम्, पुनिरपि मरणम्, पुनिरपि जननी, जठरे शयनम्, इस भांती संसार में आत्मा बार-बार भ्रमण करती रहती है। प्राचीनकाल से ऋषि मुनियों के द्वारा विवाह प्रथा चली आ रही है। मनुष्य उसी का अनुसरण करते हुए विवाह के पवित्र बंधन में बधने का संकल्प लेते हैं। ज्योतिष की मान्यता है कि जीवन साथी की जरूरत पृथ्वी पर मनुष्य को ही नहीं बल्कि ग्रह गोचर को भी इसकी जरूरत पड़ती रहती है।

विवाह संस्कार विधिवत न होने से हानि :
पति व पत्नि में मन मुटाव, तलाक होना, दूसरे जीवन साथी की तलाश, संतानहीन होना, नौकरी व व्यापार में हानि इत्यादि।

विवाह संस्कार विधिवत होने से लाभ : मान, यश, किर्ती, संतान, पदौन्नती आदि सुखों से सम्पन्न होना।

उदाहरण : आधुनिक समाज में विवाह को सामान्य काम मानकर लोग अपनी स्वेच्छा से विवाह कर लेते हैं। जोकि कुछ समय पश्चात् टूट जाते हैं। समाज, कुल, परिवार का मान सम्मान रखते हुए अगर रिश्ता आगे चलते भी हैं फिर भी जीवन में संतान का अभाव जीवन साथी के प्रति उदासीनता अपने ही मन में अपने प्रति हीन भावना लगी रहती है। ऐसी परिस्थिति में लोग जगह जगह जाकर ज्योतिषी ब्राहमणों से परामर्श लेते है जिसका निदान धन व्यय करने के बाद भी नहीं मिलता है। कहते हैं कि जीवन में विवाह एक ऐसा बंधन है कि जिसको जीवन साथी

हमारी संस्था में विवाह के लिए भारतवर्ष के किसी भी वर्ग के लड़कें व लड़कीयों के विवाह के लिए वर-कन्या उपलब्ध करायें जाते हैं। जिनका संक्षिप्त विवरण जैसे- डेट ऑफ बर्थ, प्लेस, नाम, ऐजुकेशन, हाईट आदि देकर के पंजीकृत करवाने के लिए फाईल चार्ज रू. 1100/- देना अनिवार्य है। विवाह सुनिश्चित हो जाने पर हमारी संस्था के माध्यम से गउशाला में दान हेतु वर-वधु के संरक्षक अपने सामर्थय के अनुसार दान देकर रसीद अवश्य प्राप्त करें। जिससे गउमाता के आर्शिवाद से वर-कन्या के जीवन को सफल एवं कल्याणकारी बनाने में सहयोग करें।

निर्देश : अधिक जानकारी कुण्डली के बाद ही दी जा सकती है।