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।। रूद्राभिषेक।।

विशेषतः रूद्राभिषेक भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। रूद्राभिषेक करने से मनुष्य यशस्वी, दीर्घायू, उच्च पद प्राप्ति आदि अकांशाओं से कराता है।

उदाहरण : जैसे कि पुरूषोत्तम मास, चन्द्रमास व सौर्यमास में पड़ने वाले अन्तर के फलस्वरूप हर तीसरे वर्ष मलमास ;अधिकमासद्ध आता है। यह मास अपने आप में महान शक्ति रखता है। जब एक दिन की शिवरात्री में ही भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न किया जा सकता है तो एक माह के अधिक मास की महिमा का वर्णन कहां किया जा सकता है। इस मास में भगवान भोलेनाथ का पूजन ठीक उसी प्रकार करना चाहिए जैसे बारात में दूल्हे का पूजन किया जाता है। हमें आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि भगवान विष्णु के इस माह में उनके आराध्य भोलेनाथ का जप तप व पूजन आदि हवन करके सभी दुख रोग व्याधि आदि का समूल नष्ट किया जा सकता है।

मूलतः जिनके घर में क्लेश रहता है बच्चों का मन पढ़ने में नहीं लगता है जिसके घर में आय से अधिक व्यय हो तथा उसके लिए मलमास में शिव पूजन अवश्य ही लाभदायक होगा।

रूद्राभिषेक कराने की विधि : रूद्राभिषेक, रूद्र, महा रूद्र, अति रूद्र, महा मृत्युंजय मंत्र, अकाल मृत्यु व अप मृत्यु टालने से लेकर जीवन के प्रत्येक अढ़चनों, रूकावटों व मुसीबतों से छुटकारा पाकर यह लाभकारी है। जहां तक की आपकी जानकारी के लिए बताया जा रहा है कि रूद्राभिषेक एक ब्राहमण के द्वारा, पांच ब्राहमण के द्वारा, ग्यारह, इक्कीस या सामर्थ्य के अनुसार ब्राहमणों से साधारण एवं नमक-चमक के साथ पाठ कराने से मनोकामना पूर्ण होती है। रूद्राभिषेक भगवान शिव के लिंग पर जल की धार एवं अपनी कामना की पूर्ती के लिए कई प्रकार के गन्ने का रस, दूध, जूस, जल के साथ कराने का अपना-अपना महत्व है। जब किसी जातक के जीवन में अपने आप को शत्रुओं से घिरा महसूस करे तो किसी तिथि में शिववास देखकर सरसो के तेल के द्वारा अभिशेक करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। जब कभी भी अपना व्यापार एकाएक दैनिय स्थिति आ जायें जैसे कि अपकी कम्पनी के वर्कर एवं सभी सदस्य गण अपने विपरीत हो जायें या जिन संस्थाओं से हमारा काम चल रहा हो वहां से काम मिलना बन्द हो जाये या नौकरी क्षेत्र में हमारी पदोन्नती न हो रही हो या नौकरी छूटने का भय मन में लगा हो। ऐसी परिथिति में नमक- चमक के साथ रूद्राभिषेक पाठ कराने पर ऐसी परिथितियों से मुक्ति प्राप्त होती है। जब कभी शरीर में असाध्य रोग उत्पन्न हो जाये जिसका इलाज न डॉक्टर और न ही वैद्य के पास हो। तो ऐसी परिथिति में अपनी कुण्डली में ज्योतिषी के द्वारा जानकर कुशो दक मिश्रित जल के द्वारा शिवलिंग पर नमक चमक के साथ रूद्राभिषेक करने से इंन्सान को अल्प आयु से मुक्ति मिलती है और संसार में पूर्ण आयु को भोगकर मोक्ष को प्राप्त होता है।

रूद्राभिषेक पूजन के लिए वेदी : चर्तुलिंगतोभद्र, मण्डल, षोडस मात्रिका मण्डल, शिव परिवार, नवग्रह मण्डल, वास्तु मण्डल, क्षेत्रपाल मण्डल, पंचाग मण्डल आदि इन मण्डलों पर तैतीस करोड़ देवताओं का ध्यान, आहवन, पूजन करके जप यज्ञ सम्पन्न कराया जाता है।

निर्देश : रूद्राभिषेक वैदिक विद्वानों के द्वारा ही सम्पन्न करायें जिससे वह आपके लिए लाभकारी हो, अन्यत्र मंत्र उच्चारण में त्रुटि होने पर हानिकारक भी हो सकता है।