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।। नवरात्र पूजा विधि विधान।।

विशेषतः नवरात्र को हिन्दू रीति के अनुसार माता जगत जननी जगदम्बा की आराधना के लिए मनाया जाता है।

विशेषतः नवरात्र में मां महाकाली, मां महालक्ष्मी, मां महासरस्वती प्रधांकहिरासयश्तः इन्हीं की पूजा होती है। हम अपनी कामना के अनुसार इन्हीं तीनों स्वरूपों का ध्यान, पूजन करते हैं। आराधना करने से हमारे जीवन में क्या फर्क पड़ता है, जो भी जिज्ञासु भक्तजन जानने की चेष्टा रखते हों तो विशेष जानकारी के लिए हमारी संस्था के माध्यम से नवरात्र पूजा विधि प्रस्तुत हैं :

क्रिया : क्रिया का तात्पर्य है कि जैसे पाठ साधारण या सम्पूटित हो।
कर्म : कर्म का तात्पर्य है कि उसकी मनोकामना क्या है जो कि कराने वाले पर निर्भर करता है और आचार्य के निर्देशानुसार अपने आपको सात्विक रखना।
कर्ता : कर्ता का तात्पर्य है कि जो दिक्षित मंत्रों का शुद्ध उच्चारण करने वाला हो और योग्य हो।
कन्या पूजन : तीन वर्ष से ग्यारह वर्ष तक की कन्या नवदुर्गा कहलाती है जिनका विवरण इस प्रकार है :

    ओंम कुमार्यै नमः - तीन वर्ष की कन्या के लिए
    ओंम त्रिमूत्यै नमः - चार वर्ष की कन्या के लिए
    ओंम कल्याण्यैं नमः - पांच वर्ष की कन्या के लिए
    ओंम रौहिण्यैं नमः - छह वर्ष की कन्या के लिए
    ओंम कालिकायै नमः - सात वर्ष की कन्या के लिए
    ओंम चण्डीकायैं नमः - आठ वर्ष की कन्या के लिए
    ओंम शाम्भव्यैं नमः - नौ वर्ष की कन्या के लिए
    ओंम दुर्गायैं नमः - दस वर्ष की कन्या के लिए
    ओंम सुभद्रायैं नमः - ग्यारह वर्ष की कन्या के लिए

यह कन्यायें नवदुर्गा के रूप में युग-युग पूजी जाती रहीं हैं।

भगवान श्री कृष्ण जी ने अपनी योग माया को कहा था कि आप ब्रज भूमि में प्रकट होकर हमारी लीला में सहयोग करो। हमारी इच्छा से वर्ष में चार बार तूम्हारी अनेक प्रकार से संसार में पूजा होगी। दो बार प्रकट नवरात्रा, चैत्र शुक्लपक्ष एवं आश्विन शुक्लपक्ष तथा दो बार गुप्त पूजा विधान होगी। अषाढ़ शुक्लपक्ष एवं माघ शुक्लपक्ष प्रति प्रदा से नौवीं तक तुम संसार में पूजित होकर भक्तों की मनोकामनायें पूर्ण करोगी। तब से महामाया के चार नवरात्रे आते है। दो प्रकट, दो गुप्त; इनमें कन्या पूजन का बड़ा ही महत्व है। लोग कुछ कर सके या न कर सकें। परन्तु कन्या पूजन जरूर करते हैं। विशेष रूप से कन्या पूजा सविधि करने से देवी त्वरित फल प्रदात्री होती है। उनकी मनोकामनायें पूर्ण होती हैं नौ कन्या के नाम मंत्र उपर दिये गये हैं। जिन्हें गन्ध, पुष्प, वस्त्र, भोजन आदि देकर कन्या पूजन करना सिद्ध दायक है।

कन्या पूजन से लाभ : यह पूजन विधि विधान के साथ कराये जाने से पुत्र, यश, किर्ती, विजय, व्यापार में वृद्धि आदि की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार की समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

सेवार्थः आप हमारी संस्था के माध्यम से कन्या पूजन, नवचण्डी पाठ यज्ञ अपने घर या हमारे अनुष्ठान केन्द्र के द्वारा करवा सकते हैं।

निर्देश : कृपया जो भी यज्ञ अनुष्ठान वैदिक विधि विधान से वैदिक विद्वानों के द्वारा कराने से लाभ की प्राप्ति होती है। अनुष्ठान में अच्छे प्रकार से मंत्रों का उच्चारण एवं पाठ का न होने पर हानि की प्राप्ति होती है।