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।। मूल-शान्ति-यज्ञ।।

विशेषतः गण्ड मूल दोष ग्रह नक्षत्र के अनुसार होता है। जैसे कि दृश्य होने वाले 27 नक्षत्र होते हैं। इन्हीं 27 नक्षत्रों में मनुष्य का जन्म होता है। जिसमें 6 नक्षत्र मूल संज्ञक माने जाते हैं। इन 6 नक्षत्रों में जन्म लेने वाला बालक गण्ड मूल नक्षत्र के अन्तर्गत आता है। इसमें जन्म लेने वाला बालक बहुत तेजस्वी, यशस्वी और वाचाल होता है। यह इसके अच्छे प्रभाव हैं। अगर इसी नक्षत्रों में जन्मा बालक क्रोधी, रोगी, ईष्यावान हो, कोई आश्चर्य नहीं है क्योंकि इन नक्षत्रों में जन्मे बालक के नक्षत्र दोष की शान्ति के लिए मंत्र, जप एवं यज्ञ के माध्यम से विधिवत करानी चाहिए।

उदाहरणः कभी-कभी ऐसा देख गया है कि बहुत से सज्जनों का अपने बालक के जन्म लेने के बाद गण्ड मूल शान्ति करवाते हैं फिर भी यह परेशानियां होती रहती हैं। बच्चा पैदा होने के बाद समयभाव, धनभाव या ज्ञानभाव के कारण इन नक्षत्रों की पूजा पाठ विधिपूर्वक न होने के कारण यह दोष पूर्णरूप से नष्ट नहीं हो पाता है। तो ऐसी परिस्थिति में किसी योग्य ज्योतिष या हमारी संस्था के माध्यम से पुनः नक्षत्र मंत्र जप यज्ञ करवाने से गण्ड जनित दोष पूर्ण रूप से नष्ट हो जाता है। जिससे मनुष्य का भाग्योदय प्रारम्भ हो जाता है।

गण्ड जनित दोष शान्ति की विधि : नक्षत्र मंत्र जप 27 कुओं का जल, 27 तीर्थ स्थलों के कंकण, समुद्र का फैन, 100 छिद्र या 27 छिद्र का घड़ा, 27 पेड़ के पत्ते, सप्तमृतिका आदि दिव्य जड़िबूटी औषधियों के द्वारा शान्ति प्रक्रिया सम्पन्न कराई जाता है।

पाठ के लिए वेदी : एकलिंगतोभद्र मण्डल, नक्षत्र मण्डल, षोडस मात्रिका मण्डल, नवग्रह मण्डल, वास्तु मण्डल, क्षेत्रपाल मण्डल, पंचाग मण्डल आदि इन मण्डलों पर तैतीस करोड़ देवताओं का ध्यान, आहवन, पूजन करके पाठ सम्पन्न कराया जाता है।

पाठ सम्पन्न कराने के लिए ब्राहमणः 5 ब्राहमणों के द्वारा या 11 ब्राहमणों के द्वारा 1 दिन में सम्पन्न किया जाता है।

निर्देश : गण्ड मूल शान्ति कराने में विशेष नक्षत्र मंत्र जप पूजन सामग्री और योग्य ब्राहमण के ज्ञान के उपर निर्धारित करता है। यदि इसमें से किसी भी प्रकार का अभाव होने पर नक्षत्र दोष शान्त नहीं होगा।