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।। मांगलिक-दोष निवारण-यज्ञ।।

विशेषतः मांगलिक दोष मानव जीवन के लिए एक अभिशाप है। यह योग जन्म कुण्डली में जब मंगल ग्रह एक चार सात आठ बारह इन घरों में विराजमान हो तो यह दोष उत्पन्न होता है। इस दोष के कारण मानव जीवन में विभिन्न कठिनाईयां उत्पन्न होती हैं।

मांगलिक दोष से हानि :
वैधव्य योग, तलाक योग, विधुर योग, विवाह में विलम्ब योग, आगजनी योग आदि।

दोष का उद्धारण : जन्म कुण्डली में यदि मांगलिक दोष होता है तो जीवन साथी का प्रभावशाली ग्रह साथ दे रहा हो तो भी पति पत्नि में तनाव की भावना, जीवन साथी के प्रति ईमानदारी न होना। यहां तक की मांगलिक दोष के कारण हमारे समाज में 70ः लोग बिना मांगलिक दोष का उपाय कराये विवाह कर लेते हैं। जिससे उनके जीवन में तरह तरह की परेशानियां उत्पन्न होती हैं। यहां तक देखा गया है कि कम उम्र में पति पत्नि का साथ छूट जाता है।

इन समस्याओं के समाधान के लिए हमारी संस्था में वैदिक विधि विधान से वैदिक विद्वानों के द्वारा मांगलिक दोष यज्ञ कराया जाता है जिससे कि उनका जीवन निर्बिध्न निर्वाह हो सके और मांगलिक दोष कुण्डली से समाप्त हो सके।

उपाय : मंगल ग्रह का वैदिक 51000 मंत्र जप और मंगल स्तोत्र का 11000 पाठ या सवा लक्ष्य महा मृत्युंजेय मंत्र का जप कराना चाहिए।

पाठ के लिए वेदी : लिंगतोभद्र मण्डल, षोडस मात्रिका मण्डल, नवग्रह मण्डल, वास्तु मण्डल, क्षेत्रपाल मण्डल, पंचाग मण्डल आदि इन मण्डलों पर तैतीस करोड़ देवताओं का ध्यान, आहवन, पूजन करके पाठ सम्पन्न कराया जाता है।

मंगल ग्रह का पाठ सम्पन्न कराने के लिए नौ ब्राहमणों के साथ सात दिन में सम्पन्न किया जाता है।

सवा लक्ष्य महा मृत्युंजेय मंत्र का पाठ सम्पन्न कराने के लिए नौ ब्राहमणों के नौ दिन में सम्पन्न किया जाता है।

निर्देश : कृपया जो भी यज्ञ अनुष्ठान वैदिक विधि विधान से वैदिक विद्वानों के द्वारा कराने से लाभ की प्राप्ति होती है। यदि अनुष्ठान में अच्छे प्रकार से मंत्रों का उच्चारण एवं पाठ का न होने पर हानि की प्राप्ति होती है।