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।। काल सर्प योग शान्ति महा-यज्ञ।।

विशेषतः प्राचीन काल में पितृ दोष के कारण विद्वानो का मत है कि कुण्डली में काल सर्प योग बनता है। जन्म कुण्डली में 144 प्रकार से काल सर्प योग उत्पन्न होता है। परन्तु मुख्यत यह 12 प्रकार का ही दोष पूर्ण माना जाता है। काल सर्प योग से जातक के जीवन में तरह तरह की कठिनाईयां उत्पन्न होती हैं।

उदाहरण : भारत वर्ष के बहुत सारे महा पुरूषों की जन्म कुण्डली में काल सर्प योग पाया गया है। उनके जीवन में कई प्रकार का अभाव रहा है। यदि कुण्डली में काल सर्प योग है तो इसकी विधिवत शान्ति न कराई जाये तो इंसान मानसिक विकास नहीं हो पाता। वह नौकरी आदि में अधिकारियों के शोषण का शिकार होता है। विशेषतः देख गया है कि इस योग से प्रभावित युवक युवतियों के जीवन में शिक्षा, व्यवसाय, नौकरी एवं जीवन का हर पल संघर्ष पूर्ण बन जाता है। इस प्रकार के जातक में अविश्वास एवं नपुन्सकता तक भी आ जाती है। और अपने मन का विचार किसी से प्रकट भी कर पाता और घुट-घुट कर जीवन व्यतीत करने के लिए मजबूर हो जाता है। काल सर्प योग विधिवत शान्ति के लिए आप हमारी संस्था से सम्पर्क करके अपने जीवन में काल सर्प योग नामक दोष से पूर्ण शान्ति करवायें।

काल सर्प योग से हानि : सामाजिक मान हानि, शिक्षा का अभाव, जीवन साथी का पूर्ण सहयोग न पाना, शारीरिक व मानसिक शोषण का शिकार होना, कर्म का उचित फल न मिलना, अविश्वासी होना, नपुन्सक योग आदि।

काल सर्प योग शान्ति कराने की विधि : काल सर्प योग शान्ति कराने की कई विधियां हैं : जैसे

औम नमः शिवाय मंत्र का सवा लक्ष्य जप व साथ साथ में नमका चमका अध्याय के साथ प्रतिष्ठित शिवलिंग पर चांदी व तांबे का नाग नागिन का जुगल शिवलिंग पर रखकर प्रतिदिन अभिषेख करना एवं जप सम्पन्न होने के बाद बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए।

बारह हजार नाग गायित्री मंत्र : राहू केतू का वैदिक चौगुड़ा मंत्र एवं तैरह हजार महा मुत्युंजय मंत्र का जप, सभी जप का दशांश, हवन, तर्पण, मार्जन आदि से सम्पन्न कराया जाता है।
और भी कई प्रकार से काल सर्प शान्ति का विधान हैं जोकि हमारी संस्था से सम्पर्क करने पर आपको दी जा सकती हैं।

काल सर्प योग शान्ति यज्ञ के लिए वेदी : चर्तुलिंगतोभद्र या द्ववादस लिंगतोभद्र, मण्डल, षोडस मात्रिका मण्डल, नवग्रह मण्डल, वास्तु मण्डल, क्षेत्रपाल मण्डल, पंचाग मण्डल आदि इन मण्डलों पर तैतीस करोड़ देवताओं का ध्यान, आहवन, पूजन करके जप यज्ञ सम्पन्न कराया जाता है।

काल सर्प यज्ञ सम्पन्न कराने के लिए ब्राहमण : ग्यारह ब्राहमणों के साथ पांच व सात दिन में सम्पन्न किये जाते है।

निर्देश : कृपया काल सर्प शान्ति यज्ञ को करने वाला ब्राहमण विद्वान होना चाहिए जो जप यज्ञ का शुद्ध उच्चारण कर सके जिससे लाभ की प्राप्ति हो। अगर जप यज्ञ का अशुद्ध उच्चारण हुआ तो तत्काल हानि की प्राप्ति होती है।